मंत्र जप ध्वनि और एकाग्रता के माध्यम से ऊर्जा जाग्रत करने की आंतरिक साधना है, जबकि आरती प्रेम, भाव और पूजा की त्रुटियों की क्षमा मांगने का एक सामूहिक और संगीतमय उत्सव है।
आरती और मंत्र जप दोनों ही ईश्वर की उपासना के तरीके हैं, लेकिन इनके मूल उद्देश्य और प्रकृति में गहरा अंतर है।
मंत्र जप एक 'ध्वनि और ऊर्जा विज्ञान' है। इसमें विशिष्ट अक्षरों की पुनरावृत्ति से शरीर के चक्रों और ब्रह्मांडीय ऊर्जा को जाग्रत किया जाता है।