शास्त्रों में आत्महत्या महापाप है। ईशोपनिषद (3): आत्महन् अंधकारमय लोक प्राप्त करते हैं। गरुड़ पुराण: प्रेत योनि में भटकना। प्रारब्ध भोगने शेष रहता है। परिवार श्राद्ध-तर्पण कराए। मानसिक कष्ट में विशेषज
हिंदू शास्त्रों में आत्महत्या को महापाप माना गया है और इसके गंभीर आध्यात्मिक परिणाम बताए गए हैं। शास्त्रीय दृष्टिकोण: 1।
ईशोपनिषद (श्लोक 3): *'असुर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसाऽवृताः'* — जो आत्मा का हनन करते हैं वे अंधकारमय लोकों को प्राप्त होते हैं।