अग्नि के कान-नाक-आँख में होम करने से क्या होता है?
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संक्षिप्त उत्तर
शास्त्रीय लक्षण (लाक्षणिक अर्थ): कान में होम → बहरा, नाक में होम → तनावग्रस्त, आँख में होम → अंधा। गूढ़ अर्थ: आहुति सदैव पूर्ण प्रज्वलित ज्वाला (अग्नि के मुख) में ही दें।
लाक्षणिक रूप से शास्त्रों में कहा गया है कि अग्नि के कान में होम करने से व्यक्ति बहरा होता है, नाक में होम करने से तनावग्रस्त रहता है, और आँख में होम करने से अंधा हो जाता है।
इसका गूढ़ अर्थ यही है कि आहुति पूर्ण प्रज्वलित ज्वाला (अग्नि के मुख) में ही अर्पित होनी चाहिए।