अग्नि स्थापन मंत्र: 'ॐ भूर्भुवः स्वर्द्यौरिव भूम्ना पृथिवीव वरिम्णा। तस्यास्ते पृथिवि देवयजनि पृष्ठेऽग्निमन्नादमन्नाद्यायादधे॥' अर्थ: हे देवयजनि पृथ्वी! तेरे पृष्ठ भाग पर अग्निदेव को अन्न-प्राप्ति और
अग्नि स्थापन मन्त्र: 'ॐ भूर्भुवः स्वर्द्यौरिव भूम्ना पृथिवीव वरिम्णा।
तस्यास्ते पृथिवि देवयजनि पृष्ठेऽग्निमन्नादमन्नाद्यायादधे॥' इस मन्त्र का भाव है कि जिस प्रकार द्युलोक अपनी विशालता से और पृथ्वी अपनी चौड़ाई से महान है, उसी प्रकार हे देवयजनि पृथ्वी! मैं तेरे पृष्ठ भाग