साहूकार की बहू के हाथों अनजाने में सेही का बच्चा मर गया, जिससे उसकी संतानें मरने लगीं। वृद्धाओं की सलाह पर उसने कार्तिक अष्टमी को सेही का चित्र बनाकर अहोई माता की पूजा और क्षमायाचना की। माता की कृपा स
अहोई अष्टमी की सर्वाधिक प्रचलित व्रत कथा इस प्रकार है: प्राचीन काल में एक साहूकार था जिसके सात पुत्र, सात पुत्रवधुएँ और एक पुत्री थी।
दीपावली से कुछ दिन पहले कार्तिक माह में सातों बहुएँ घर की लिपाई-पुताई के लिए मिट्टी लेने जंगल गईं। उनके साथ ननद भी थी।