मंत्र विधि
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अखंड नाम संकीर्तन और अखंड जप में क्या अंतर है?
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संक्षिप्त उत्तर
संकीर्तन: सामूहिक, सस्वर गायन, संगीत, बहिर्मुखी, भक्ति प्रसार। जप: व्यक्तिगत, मौन/उपांशु, माला, अंतर्मुखी, मंत्र सिद्धि। चैतन्य: संकीर्तन श्रेष्ठ। योग: जप श्रेष्ठ। दोनों सत्य — मार्ग भिन्न, लक्ष्य एक।
दोनों 'अखंड' (निरंतर) हैं, परंतु विधि भिन्न: अखंड नाम संकीर्तन: - सामूहिक — भक्तों का समूह मिलकर। - सस्वर गायन — भजन, कीर्तन, संगीत सहित।
ढोलक, मृदंग, झांझ। - उच्च स्वर में — 'हरे कृष्ण', 'राम राम' गाते हुए।
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