व्रत
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अमावस्या को पूजा करने का क्या विशेष विधान है
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संक्षिप्त उत्तर
अमावस्या पूजा: पितृ तर्पण (तिल-जल, दक्षिण मुख) प्रमुख। श्राद्ध, गाय-कौवे-कुत्ते को भोजन। शनिश्चरी = शनि पूजा + पीपल। दान + ब्राह्मण भोजन। शुभ कार्य वर्जित। विशेष: सोमवती, शनिश्चरी, सर्वपितृ, माघ अमावस
अमावस्या पितरों से विशेष रूप से जुड़ी तिथि है। इस दिन पितृलोक का द्वार खुला माना जाता है।
पितृ तर्पण (प्रमुख कर्म): तिल-जल-कुश से पितरों को तर्पण। दक्षिण दिशा में मुख। पितृतीर्थ (अँगूठे-तर्जनी के बीच) से जल अर्पित।
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