माँ कूष्मांडा = सृष्टि की आरंभिक ऊर्जा का प्रतीक। इनकी आराधना से साधक का अनाहत चक्र जाग्रत होता है → प्रेम + करुणा + स्वास्थ्य के गुण विकसित।
चूँकि माँ कूष्मांडा का स्वरूप सृष्टि की आरंभिक ऊर्जा का प्रतीक है, अतः इनकी आराधना से आध्यात्मिक साधक का अनाहत चक्र जाग्रत होता है, जिससे उसमें प्रेम, करुणा व स्वास्थ्य के गुण विकसित होते हैं।