अंधतामिस्र में अंधकार — तामिस्र से भी गहरा 'परम अंधकार'। न प्रकाश, न आवाज, न स्पर्श — केवल भयावह एकाकीपन। 'चुगली करने वालों को अंधेरे में तड़पाया जाता है।' पाप के ज्ञान-नाश का प्रतीक।
गरुड़ पुराण में अंधतामिस्र नरक के अंधकार का वर्णन तामिस्र से भी अधिक गहरा और भयावह है। परम अंधकार — 'अंध + तामिस्र' = परम अंधकार।
तामिस्र में घना अंधकार है, किंतु अंधतामिस्र में उससे भी गहरा, परम अंधकार है जिसमें जीव को अपना अस्तित्व भी अनुभव नहीं होता।