वामन पुराण के अनुसार पार्वती ने खेल में शिव की आँखें ढक दीं, जिससे जगत में अंधकार छा गया। शिव ने तीसरा नेत्र खोला जिसकी उष्मा से पार्वती के पसीने से एक भयंकर बालक प्रकट हुआ। अंधकार में जन्मा होने से उ
अंधकासुर की उत्पत्ति की कथा वामन पुराण में वर्णित है और यह शिव-पार्वती की एक अनूठी लीला से जुड़ी है।
वामन पुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव और माता पार्वती काशी पहुँचे। भगवान शिव पूर्व दिशा की ओर मुख करके ध्यानस्थ बैठे थे।