हाँ, अनजाने पाप का फल भी मिलता है (मनुस्मृति) — जैसे अग्नि अनजाने छूने पर भी जलाती है। पर जानबूझकर किए पाप से हल्का। प्रायश्चित (तप, जप, दान) से क्षमा संभव। गीता (4.37): ज्ञान की अग्नि सभी कर्मों को भ
हाँ, शास्त्रों के अनुसार अनजाने (अज्ञानवश) किए गए पाप का फल भी मिलता है, हालाँकि जानबूझकर किए गए पाप की तुलना में इसका फल हल्का होता है।
शास्त्रीय आधार: मनुस्मृति में स्पष्ट कहा गया है कि ज्ञात और अज्ञात दोनों कर्मों का फल मिलता है।