अश्वत्थामा चिरंजीवी हैं — परंतु शाप से, वरदान से नहीं। सोते पांचालों की हत्या और गर्भस्थ परीक्षित पर ब्रह्मास्त्र के दंडस्वरूप कृष्ण ने मणि छीनी और शाप दिया — रोग, दुर्गंध, एकाकीपन में अनंत काल तक भटक
अश्वत्थामा (द्रोणाचार्य पुत्र) सप्त चिरंजीवियों में से एक हैं, परंतु उनका अमरत्व वरदान नहीं बल्कि शाप का परिणाम है — यह उन्हें अन्य चिरंजीवियों से भिन्न बनाता है।