अश्वत्थामा ने आग्नेयास्त्र से अर्जुन पर आक्रमण किया और पांडवों की एक पूरी अक्षौहिणी सेना को भस्म कर दिया। यह दिव्यास्त्र के दुरुपयोग का भयावह उदाहरण है।
अश्वत्थामा ने दो प्रमुख प्रसंगों में आग्नेयास्त्र का प्रयोग किया।
पहला, अपने पिता द्रोण की मृत्यु से क्षुब्ध और क्रोधित होकर उन्होंने युद्ध के नियमों की अवहेलना करते हुए अर्जुन के विरुद्ध आग्नेयास्त्र का प्रयोग किया था।