अपार आनन्द — नगर सजा, तोरण-पताकाएँ, मंगलगान। 'नगर नारि नर रूप निहारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी' — बहुओं का रूप देख नेत्र-फल पाकर सुखी। ब्राह्मणों को दान, गरीबों को भोजन, अयोध्या उत्सवमय।
अयोध्या वापसी पर नगरवासियों ने अपार आनन्द और उत्साह से स्वागत किया। नगर सजाया गया, तोरण-पताकाएँ लगीं, घर-घर मंगलगान हुआ।
नगर की स्त्री-पुरुष बहुओं का रूप देखकर सुखी हो रहे हैं — 'नगर नारि नर रूप निहारी।