बभ्रुवाहन की कथा गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय 'बभ्रुवाहनप्रेतसंस्कार' में है। इसमें दूसरे के दिए पिंडदान से प्रेत-मुक्ति का वर्णन है। इस कथा को सुनने-सुनाने वाले प्रेतत्व को प्राप्त नहीं होते।
बभ्रुवाहन की कथा गरुड़ पुराण के सातवें अध्याय में वर्णित है।
इस अध्याय का नाम है — 'बभ्रुवाहनप्रेतसंस्कार' — अर्थात् बभ्रुवाहन द्वारा किया गया प्रेत का संस्कार।