लक्ष्मणजी ने परशुरामजी से कहा — बचपन में बहुत धनुष तोड़े, कभी ऐसा क्रोध नहीं हुआ। प्रसिद्ध व्यंग्य — शिवजी के दिव्य धनुष को 'धनुही' (साधारण छोटा धनुष) कहा।
यह लक्ष्मणजी ने परशुरामजी से कहा।
अर्थ — हमने बचपनमें बहुत-सी धनुहियाँ (छोटे धनुष) तोड़ी हैं; हे गोसाईं! कभी किसीने ऐसा क्रोध नहीं किया (कि एक पुराना धनुष टूट गया तो इतना गुस्सा)।