बीज मंत्र जप से: देवता की मूल सत्ता से सीधा संपर्क, मंत्र में चेतना संचार, पंचतत्व शुद्धि-संतुलन, आरोग्य, मानसिक शांति, और क्रमिक जप से नाड़ी शुद्धि व कुंडलिनी जागरण होता है।
जब कोई साधक किसी देवता के बीज मंत्र का जप करता है, तो वह केवल उनके किसी गुण या स्वरूप से नहीं, अपितु उनकी मूल सत्ता से, उनके स्रोत से सीधा संपर्क स्थापित करता है।
बीज ही उस मंत्र में चेतना का संचार करता है और उसे फलदायी बनाता है। साधक के अंतर्जगत में रूपांतरण लाने में इनकी भूमिका अद्वितीय है।