मूलाधार से आज्ञा चक्र तक बीज मंत्रों का क्रमिक जप करने से समस्त नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं और मूलाधार में सर्प की भाँति सोई कुंडलिनी महाशक्ति जाग्रत होकर ऊपर उठने लगती है — यही कुंडलिनी जागरण की वैज्ञानि
मूलाधार से लेकर आज्ञा चक्र तक इन बीज मंत्रों का क्रमिक जप करने से समस्त नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं और मूलाधार चक्र में सर्प की भाँति सोई हुई कुंडलिनी महाशक्ति जाग्रत होकर ऊपर की ओर उठने लगती है।
यही कुंडलिनी जागरण की वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसका आधार बीज मंत्र हैं।