जैसे प्राण के बिना शरीर निर्जीव है — वैसे बीज के बिना कोई भी बड़ा मंत्र शक्तिहीन और चैतन्य-रहित होता है। बीज ही मंत्र में चेतना का संचार करता है और उसे फलदायी बनाता है — इसीलिए बीज मंत्र 'मंत्रों का प
यही कारण है कि बीज मंत्रों को 'मंत्रों का प्राण' कहा जाता है।
जिस प्रकार प्राण के बिना शरीर निर्जीव है, उसी प्रकार बीज के बिना कोई भी बड़ा मंत्र शक्तिहीन और चैतन्य-रहित होता है।