बीज मंत्र जप की तीन विधियाँ: वाचिक (सामान्य), उपांशु (100 गुना फल), मानस जप (1000 गुना फल — सर्वोत्तम)। माला: 108 मनके, मध्यमा-अनामिका से, तर्जनी वर्जित, गोमुखी में रखें। अनुस्वार को नाक से गुंजाएं। ग
बीज मंत्र जप की शास्त्रोक्त विधि कुलार्णव तंत्र और मंत्रमहार्णव में विस्तार से वर्णित है: पूर्व-आवश्यकताएं (कुलार्णव तंत्र 15।
गुरु-दीक्षा — बीज मंत्र गुरु से दीक्षित होकर ही जपें। अदीक्षित जप में शक्ति-जागृति नहीं होती।