कुलार्णव: शुद्ध स्थान, शुद्ध समय, शुद्ध वेश, शुद्ध मन — चारों शुद्धि से सिद्धि। नियम: स्नान, सात्विक आहार, मौन, ब्रह्मचर्य, नित्य निश्चित संख्या, जप बीच में न छोड़ें, मंत्र गोप्य रखें। माला जमीन पर न
बीज मंत्र जप के नियम शास्त्रों में बहुत स्पष्ट और कठोर हैं। इनका पालन साधना की सफलता के लिए अनिवार्य है: कुलार्णव तंत्र (15।