कुलार्णव: बिना दीक्षा सिद्धि नहीं। पाँच शर्तें: गुरु-दीक्षा, पुरश्चरण (अक्षर × 1000 जप), तर्पण-हवन-अभिषेक-ब्राह्मण भोजन, नियम-पालन (ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार), निष्काम भाव। सिद्धि के लक्षण: विशेष गंध/प
बीज मंत्र सिद्धि प्राप्त करने की विधि कुलार्णव तंत्र और मंत्रमहार्णव में विस्तार से वर्णित है: सिद्धि की परिभाषा (मंत्रमहार्णव): 'मंत्रसिद्धिः तदा ज्ञेया यदा देवः प्रसीदति।
' — जब देवता प्रसन्न होकर साधक को दर्शन दें या उनकी कृपा स्पष्ट अनुभव हो — वह मंत्र-सिद्धि है।