आत्मा और मोक्ष
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भगवद्गीता के अनुसार आत्मा अमर है कैसे समझें
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संक्षिप्त उत्तर
गीता 2.20 — आत्मा अजन्मा, नित्य, शाश्वत। 2.23 — शस्त्र, अग्नि, जल, वायु कुछ नहीं कर सकते। 2.22 — शरीर बदलता है, आत्मा नहीं (वस्त्र उदाहरण)। 2.25 — अव्यक्त, अचिंत्य, अविकारी। सरल अर्थ: शरीर = बर्तन, आत
भगवद्गीता के दूसरे अध्याय (सांख्य योग) में श्रीकृष्ण ने आत्मा की अमरता का सबसे विस्तृत और स्पष्ट वर्णन किया है।
यह गीता का मूलभूत सिद्धांत है। आत्मा के गुण (गीता अध्याय 2): 1। अजन्मा और शाश्वत (2। 20): 'न जायते म्रियते वा कदाचिन्।
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