भगवान संकेत देते हैं — विचारों के बार-बार आने से, 'संयोग' जो संयोग नहीं, भीतरी आवाज़ से, स्वप्न से, अचानक मिली मदद से, बंद रास्ते और खुलती नई दिशा से। मन जितना शांत और जागरूक हो, संकेत उतने स्पष्ट सुन
भगवान हमसे बात करते हैं — लेकिन उनकी भाषा शब्दों की नहीं, संकेतों की है। जिसका मन शांत और जागरूक हो, वह इन संकेतों को पहचान लेता है।
संयोग जो संयोग नहीं होते — जब कोई विचार बार-बार मन में आए, जब कोई व्यक्ति अचानक रास्ते में मिले और वही बात कहे जो आप सोच रहे थे, जब कोई किताब या श्लोक बार-बार नजर आए — ये भगवान के संकेत हो सकते हैं।