हाँ, भाग्य बदला जा सकता है। वर्तमान के श्रेष्ठ कर्म, भक्ति और पुरुषार्थ से प्रारब्ध के प्रभाव को हल्का किया जा सकता है और भविष्य के भाग्य का नया निर्माण होता है। भगवान की कृपा से भी प्रारब्ध बदल सकता
यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक प्रश्न है जिसका सीधा प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है।
हिंदू दर्शन का उत्तर है — हाँ, भाग्य बदला जा सकता है, परंतु इसके लिए सचेत और दृढ़ प्रयास आवश्यक है।