भैरव साधना में मंत्रों का संश्लेषण
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भैरव साधना का अंतिम लक्ष्य क्या है?
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संक्षिप्त उत्तर
भैरव साधना का लक्ष्य द्वैत से अद्वैत की यात्रा है: 'नमः' से अहंकार विसर्जन → 'ह्रीं' से भैरवी शक्ति जागृति → 'क्लीं' से ऊर्जा को इच्छापूर्ति के लिए निर्देशित करना। साधक शिव-शक्ति के ब्रह्मांडीय खेल का
इस विस्तृत विश्लेषण के अंत में, हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि भैरव साधना में 'नमः', 'ह्रीं', और 'क्लीं' जैसे शक्तिस्वर मंत्रों का समावेश कोई विरोधाभास नहीं, बल्कि तांत्रिक दर्शन का उच्चतम संश्लेषण
संक्षेप में, भैरव साधना की यात्रा अहंकार के समर्पण और विसर्जन से शुरू होती है, जिसका प्रतीक 'नमः' है।
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