भक्ति रस
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भक्ति में वात्सल्य भाव क्या है?
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संक्षिप्त उत्तर
वात्सल्य: भक्त=माता/पिता, भगवान=बालक। 5 रसों में एक। भक्त 'बड़ा'=अद्भुत (परब्रह्म छोटा)। यशोदा+बालकृष्ण=सर्वोच्च। कौशल्या+राम। भाव: खिलाना/सुलाना/रक्षा/डाँट=प्रेम। सूरदास=वात्सल्य कवि। साधना: बाल गोपा
वात्सल्य भाव = भक्ति का वह रूप जिसमें भक्त भगवान को अपना बालक/शिशु मानता है और उसकी देखभाल/लालन-पालन करता है।
शास्त्रीय परिभाषा: भक्ति रसामृत सिन्धु (रूपगोस्वामी): पाँच प्रमुख भक्ति-रसों में से एक — शांत, दास्य, सख्य, वात्सल्य, माधुर्य।
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