त्रिपुंड = अनामिका-मध्यमा-कनिष्ठिका से भ्रुकुटी के मध्य तीन रेखाएं। यह ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र का प्रतीक है। 'ॐ नमः शिवाय' बोलते हुए धारण करने से शिव की परम भक्ति प्राप्त होती है।
शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता के अनुसार शिव भक्तों को नित्य भस्म का त्रिपुंड धारण करना चाहिए।
अनामिका, मध्यमा और कनिष्ठिका (बीच की उंगली और छोटी उंगली) का उपयोग कर भ्रुकुटी के मध्य तीन रेखाओं वाला त्रिपुंड बनाया जाता है।