'भव रोगिणाम भेषजम्' का अर्थ है 'संसार रूपी रोग की औषध' — शिव समस्त भौतिक और मानसिक रोगों की औषध हैं और मन की मूलभूत अस्थिरता को दूर करते हैं।
चन्द्रशेखराष्टकम् के श्लोक 6 में शिव को 'भेषजं भवरोगिणाम्' (संसार रूपी रोग की औषध) कहा गया है।
सरल अर्थ: शिव संसार रूपी रोग (भव रोग) की औषध हैं, जो सभी विपत्तियों को दूर करते हैं, त्रिगुणात्मक हैं, त्रिनेत्रधारी हैं, और भोग और मुक्ति दोनों फल प्रदान करते हैं।