भोजन से पहले 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे' और 'ब्रह्मार्पणम्' श्लोक बोलें। भोजन के बाद पाचन हेतु 'अगस्त्यं कुम्भकर्णं च' मंत्र बोलें। भोजन से पहले हाथ-पाँव-मुँह धोना जरूरी है।
हमारी वैदिक परंपरा में भोजन को केवल पेट भरने की क्रिया नहीं, बल्कि एक यज्ञ के समान पवित्र कार्य माना गया है।
शास्त्रों में 'अन्नम ब्रह्म' कहकर अन्न को ब्रह्म का स्वरूप बताया गया है। इसीलिए भोजन से पहले और बाद में मंत्र बोलने की परंपरा है।