पुराणों में अर्धनारीश्वर का प्राकट्य
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भृंगी प्रसंग में शिव ने क्या किया?
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संक्षिप्त उत्तर
भृंगी प्रसंग में शिव ने पार्वती के मान की रक्षा हेतु स्वयं को पार्वती के साथ एकाकार कर अर्धनारीश्वर रूप धारण कर लिया।
जब भृंगी ने केवल शिव की परिक्रमा करने का हठ किया, तब देवी पार्वती के मान की रक्षा हेतु, शिव ने स्वयं को पार्वती के साथ एकाकार कर अर्धनारीश्वर रूप धारण कर लिया।
भृंगी ने तब भी भ्रमर (भृंगी) रूप धारण कर दोनों के बीच से निकलने का प्रयास किया, जिससे शिव ने उन्हें अपूर्णता का दंड दिया, किंतु पार्वती के अनुनय पर उन्हें संबल हेतु तीसरी टांग दी।
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