भूतशुद्धि = ध्यान में पंचतत्वों को क्रमशः लय करना: पृथ्वी → जल → अग्नि → वायु → आकाश → अहंकार → महत → परब्रह्म की प्रकृति/माया में। इसके बाद दिव्य, शुद्ध शरीर की भावना — जो देवी की उपासना के योग्य हो।
तांत्रिक और आगम ग्रंथों में 'भूतशुद्धि' एक अत्यंत रहस्यमयी और अनिवार्य प्रक्रिया है।
इसके अंतर्गत साधक ध्यान की अवस्था में अपने स्थूल शरीर का मानसिक रूप से लय करता है।