बीमार और बुजुर्ग लोग सिर्फ फलाहार करके या शाम को एक समय भोजन (नक्त) करके व्रत कर सकते हैं। बहुत ज्यादा बीमार लोगों के लिए घर का कोई दूसरा सदस्य 'प्रतिनिधि' बनकर उनका व्रत रख सकता है।
शास्त्रों के अनुसार 8 से 85 वर्ष के स्वस्थ व्यक्ति के लिए यह व्रत अनिवार्य है, लेकिन जो लोग रोगी हैं, अत्यंत वृद्ध हैं या बालक हैं, उनके लिए नियमों में भारी छूट है।
ऐसे लोग 'फलाहार' (फल और साबूदाना) खाकर या 'नक्त' (दिन में उपवास और शाम को सिर्फ एक समय भोजन) रखकर व्रत कर सकते हैं।