मंत्र जप नियम
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बिना स्नान किए मंत्र जप करने से क्या दोष लगता है?
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संक्षिप्त उत्तर
अनुष्ठान = स्नान अनिवार्य। दैनिक = उत्तम, अनिवार्य नहीं (बीमारी/यात्रा)। विकल्प: हाथ-मुंह + आचमन + 'ॐ' 3 बार। मानस जप = सर्वत्र (बिना स्नान भी)।
बिना स्नान मंत्र जप: शास्त्रीय दृष्टि: स्नान = शरीर शुद्धि। अशुद्ध शरीर = मंत्र शक्ति कम। कुछ ग्रंथ: बिना स्नान = जप निष्फल।
व्यावहारिक: - वैदिक/तांत्रिक अनुष्ठान: स्नान अनिवार्य। रुद्राभिषेक, सप्तशती पाठ, सवा लाख जप = स्नान बिना नहीं।
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