ब्रह्म ग्रंथि का व्यावहारिक महत्व: दो मनके आपस में नहीं टकराते जिससे जप में ध्वनि नहीं होती और एकाग्रता भंग नहीं होती — माला टूटने पर भी सभी मनके बिखरते नहीं हैं।
ब्रह्म-ग्रंथि का व्यावहारिक महत्व यह है कि यह ग्रंथि दो मनकों को आपस में टकराने से रोकती है, जिससे जप के समय ध्वनि नहीं होती और साधक की एकाग्रता भंग नहीं होती।
यदि माला कभी टूट भी जाए, तो सभी मनके बिखरते नहीं हैं।