ऋषि के निर्देश पर क्षत्रिय ने कामिका एकादशी का व्रत कर रात भर जागरण किया था। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उसे ब्रह्महत्या जैसे घोर पाप से मुक्त कर दिया।
क्षत्रिय द्वारा ब्राह्मण की हत्या (ब्रह्महत्या) एक जघन्य पाप है।
ऋषि के मार्गदर्शन पर क्षत्रिय ने श्रद्धा के साथ 'कामिका एकादशी' का व्रत रखा, निराहार रहा और पूरी रात भगवान विष्णु की प्रतिमा के सम्मुख जागरण किया।