ब्रह्मयज्ञ = वेद/शास्त्र का अध्ययन-अध्यापन। पंच महायज्ञों में प्रथम। ऋषि ऋण मुक्ति हेतु। विधि: संध्या के बाद वेद शाखा का पाठ, गायत्री जप, ऋषि तर्पण। सरल रूप: प्रतिदिन गीता/उपनिषद् का कुछ अंश पढ़ना-मनन
ब्रह्मयज्ञ पाँच महायज्ञों (पंचमहायज्ञ) में प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण है। यह गृहस्थ का नित्य कर्तव्य माना गया है। पंच महायज्ञ (मनुस्मृति): 1।