21 व्रत पूरे होने पर 22वें बुधवार को हवन किया जाता है। हवन में तिल, जौ, घी और मेवे से 'ॐ गं गणपतये स्वाहा' और 'ॐ बुं बुधाय स्वाहा' बोलकर 108 आहुतियां दी जाती हैं।
अग्नि पुराण के अनुसार, 21 बुधवार पूर्ण होने के बाद 22वें बुधवार को विधिवत उद्यापन करना चाहिए। प्रातः मंडप सजाकर पूजन करें।
फिर हवन कुंड बनाकर उसमें तिल, जौ, घी, शक्कर और सूखे मेवे की आहुति दें।