चमकाध्याय = अष्टम अध्याय। देवता: अग्नि। 29 मंत्र। 'च मे' (मुझे यह प्राप्त हो) की बहुलता। नमकम् में शिव को नमन, चमकाध्याय में शिव से मांगना। भौतिक और आध्यात्मिक संपदा की पूर्ण प्रार्थना।
चमकाध्याय रुद्राष्टाध्यायी का अष्टम (आठवाँ) और अंतिम अध्याय है, जिसके देवता अग्नि हैं।
इसमें २९ मन्त्र हैं जिनमें 'च मे' (और मुझे यह प्राप्त हो) की बहुलता है। प्रत्येक मन्त्र के अंत में 'यज्ञेन कल्पन्ताम्' आता है।