चन्द्रदोष तब होता है जब चन्द्रमा कुंडली में नीच राशि में, अमावस्या के निकट क्षीण, या शनि/राहु/केतु के साथ हो — इससे भय, चिंता, अस्थिरता और अवसाद जैसे मानसिक कष्ट होते हैं।
जब चन्द्रमा कुंडली में दुर्बल स्थिति में होता है (जैसे नीच राशि में, अमावस्या के निकट क्षीण, या क्रूर ग्रहों — शनि, राहु, केतु — के साथ युति में), तो इसे चन्द्रदोष कहा जाता है।
इस दोष के कारण व्यक्ति में अनावश्यक भय, चिंता, निर्णय लेने में अस्थिरता, भावनात्मक गिरावट, और यहाँ तक कि अवसाद जैसे मानसिक कष्ट उत्पन्न होते हैं।