हिंदू दर्शन
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चार वर्ण कैसे बने मूल उद्देश्य क्या था
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संक्षिप्त उत्तर
गीता 4.13 — वर्ण गुण-कर्म से, जन्म से नहीं। मूल उद्देश्य: सामाजिक श्रम विभाजन — ब्राह्मण (ज्ञान), क्षत्रिय (रक्षा), वैश्य (अर्थ), शूद्र (सेवा)। महाभारत — 'कर्म से ब्राह्मण, जाति से नहीं।' जन्म आधारित
चार वर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) हिंदू समाज व्यवस्था का प्राचीन ढांचा है।
इसके मूल उद्देश्य और बाद के विकृत रूप को अलग-अलग समझना आवश्यक है। पुरुष सूक्त (ऋग्वेद 10। 12): 'ब्राह्मणोऽस्य मुखमासीद्बाहू राजन्यः कृतः।
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