साधना के लाभ
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छिन्नमस्ता साधना से कुंडलिनी जागरण कैसे होता है?
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संक्षिप्त उत्तर
छिन्नमस्ता साधना = कुंडलिनी शक्ति के प्रचंड जागरण का प्रतीक। षट्चक्रों का संतुलन → विभिन्न सिद्धियाँ प्राप्ति। यह आत्म-बलिदान और जीवन-मृत्यु चक्र की स्वीकृति से कुंडलिनी जागृत करती है।
माँ छिन्नमस्ता की साधना कुंडलिनी जागरण और षट्चक्रों के संतुलन में अत्यंत सहायक है, जिससे साधक को विभिन्न सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
यह साधना आत्म-बलिदान, जीवन-मृत्यु के चक्र की स्वीकृति और कुंडलिनी शक्ति के प्रचंड जागरण का प्रतीक है।
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