दान में दोष पर — श्राद्ध में अपवित्र अन्न पर श्वेतकुष्ठ, गलत पंडित से श्राद्ध पर नरक। दान में अहंकार का फल अपूर्ण। 'निंदक-नशेड़ी पंडित से कर्म करवाने वाला नरकगामी।'
गरुड़ पुराण में दान में दोष — अशुद्ध दान, अपात्र दान, अभिमान से दान — के परिणामों का वर्णन है।
श्राद्ध में अपवित्र अन्न — 'श्राद्ध में अपवित्र अन्न देने वाला श्वेतकुष्ठी होता है। ' दान में अशुद्धि का यह पुनर्जन्म-दंड है।