दधीचि ने कहा — 'यह शरीर तो एक न एक दिन नष्ट हो ही जाएगा। यदि यह किसी उपयोगी उद्देश्य की पूर्ति कर सके, तो ऐसा ही हो।' यह कहकर उन्होंने योग शक्ति से प्राण त्याग दिए।
महर्षि दधीचि के प्रसिद्ध शब्द आज भी त्याग की भावना को परिभाषित करते हैं।
देह त्यागने से पहले उन्होंने कहा था — 'यह शरीर तो एक न एक दिन नष्ट हो ही जाएगा। यदि यह किसी उपयोगी उद्देश्य की पूर्ति कर सके, तो ऐसा ही हो।