देव पूजा में चांदी इसलिए वर्जित है क्योंकि इसकी शीतल चंद्र-प्रधान ऊर्जा देवताओं की उग्र सूर्य-प्रधान ऊर्जा से मेल नहीं खाती — इस ऊर्जा-असंगति से देव पूजा प्रभावित होती है। चांदी पितृ-कार्य में श्रेष्ठ
यद्यपि चांदी भगवान शिव के नेत्रों से उत्पन्न एक परम पवित्र धातु है, तथापि शास्त्रों के अनुसार इसका संबंध पितरों से माना गया है।
पितृ-कार्य (श्राद्ध आदि) में चांदी का प्रयोग श्रेष्ठ फल देता है। किन्तु देव-कार्य में इसका प्रयोग सामान्यतः वर्जित है।