तांबा विशुद्ध धातु है जिसमें कोई मिश्रण नहीं — इसमें रखा जल ऊर्जा ग्रहण करके पवित्र होता है। इससे सूर्य को अर्घ्य देने पर कुंडली में सूर्य-चंद्र-मंगल मजबूत होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
देव-पूजा में तांबे के बर्तनों का प्रयोग सर्वाधिक शुभ और अनिवार्य माना गया है।
इसका प्रमुख कारण यह है कि ताम्र एक विशुद्ध धातु है, जिसमें किसी अन्य धातु का मिश्रण नहीं होता।