नित्यकर्म
?
देवयज्ञ पितृयज्ञ भूतयज्ञ मनुष्ययज्ञ और ब्रह्मयज्ञ कैसे करें
PAURANIK.ORG
संक्षिप्त उत्तर
पंच महायज्ञ: (1) ब्रह्मयज्ञ = वेद/शास्त्र अध्ययन (ऋषि ऋण)। (2) देवयज्ञ = हवन/अग्निहोत्र (देव ऋण)। (3) पितृयज्ञ = तर्पण/श्राद्ध/माता-पिता सेवा (पितृ ऋण)। (4) भूतयज्ञ = गाय-कुत्ते-कौवे-चींटियों को भोजन
पंच महायज्ञ प्रत्येक गृहस्थ का दैनिक कर्तव्य है। 67-72) और शतपथ ब्राह्मण (11। 1) में इनका विस्तृत विधान है।
ब्रह्मयज्ञ (ऋषि यज्ञ): उद्देश्य: ऋषि ऋण मुक्ति — वेदों का ज्ञान देने वाले ऋषियों के प्रति कृतज्ञता।
📖
सम्पूर्ण उत्तर पढ़ें
शास्त्रीय प्रमाण सहित विस्तृत उत्तर
पूरा उत्तर पढ़ें →
PAURANIK.ORG