भागवत पुराण: धर्म (विष्णु) के बिना धन (लक्ष्मी) आसुरी संपत्ति बन जाता है और मनुष्य के पतन का कारण बनता है। बिना ज्ञान के धन उन्माद देता है, बिना न्याय के नीति शोषण बनती है।
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, जब धन (लक्ष्मी) का प्रयोग धर्म (विष्णु) के बिना होता है, तो वह धन आसुरी संपत्ति बन जाता है, वह चंचला बन जाती है और अंततः मनुष्य के पतन का कारण बनती है।
आधुनिक परिप्रेक्ष्य में इस सिद्धांत का अर्थ यह है कि बिना ज्ञान (बोध) के यदि धन प्राप्त हो जाए, तो वह उन्माद पैदा करता है।