सीताजी ने चकित होकर रामजी को देखा — नेत्र अपना खजाना पाकर स्थिर हो गये। सखियों ने सीताजी को रामजी के समीप ले जाकर जयमाला पहनवायी। गुरुजनों की लाज से सकुचाती थीं पर हृदय में आनन्द था।
धनुष भंग के बाद सीताजी ने चकित चित्तसे श्रीरामजी को देखा और फिर सखियों के साथ आकर श्रीरामजी को जयमाला पहनाई।