धनुष टूटने की ध्वनि कैसी थी — क्या-क्या प्रभाव हुआ?
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संक्षिप्त उत्तर
भयंकर कठोर ध्वनि — सब लोक भर गये, सूर्य के घोड़े भटके, दिग्गज चिंघाड़े, पृथ्वी डोली, शेष-वाराह-कच्छप कलमलाये। देवता-मुनि कानों पर हाथ रखे। 'कोदंड खंडेउ राम तुलसी जयति बचन उचारहीं' — सब 'जय श्रीराम' बो
धनुष टूटने की ध्वनि इतनी भयंकर और कठोर थी कि सम्पूर्ण भुवन (लोक) भर गये।
सूर्य के घोड़े मार्ग छोड़कर चलने लगे, दिग्गज (दिशाओंके हाथी) चिंघाड़ने लगे, पृथ्वी डोलने लगी, शेष, वाराह और कच्छप कलमला उठे।